कोहरा


बादल से छने
धुएँ के गोले
फैलते शहर में
सड़कों से मिलते

सफ़ेद धुएँ से
लिपी पुती सड़कें
आँखों पर पर्दे सी
चादर धुएँ की
गाड़ियों की बत्तियों पर
जमी धुएँ की गर्द
कुछ भी न दिखाई दे
कुछ भी न सुझाई दे
कभी लगे जीवन सा
कभी मृत्यु ले आए
कभी सुख की अनुभूति
कभी दुख बनके छा जाए
सफ़ेद , घना , आँखों पर पर्दे सा
कोहरा

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