जौन भी एक नौजवां गुज़रा


जौन स्कूल जाने के लिए घर से तो निकलते थे मगर स्कूल नहीं जाते थे । दोस्तों के साथ खेलते फिरते थे । एक दिन उस्ताद ने बाबा शफ़ीक़ हसन एलिया से शिकायत करदी । उसके बाद जो डांट पड़ी है उसका असर जौन ने इतना ज़्यादा ले लिया की रात रात भर पढ़ने लगे और सिर्फ़ पढ़ते ही रहते थे । यहाँ तक की अम्मा को कहना पड़ गया कि "जौन अब किताबें रख दे"। मगर जौन ने तो ठान ही ली थी । और पढ़ने में जौन को इंस्पाइर करने के लिए बड़े भाई भी तो थे, रईस अमरोहवी और सय्यद मोहम्मद तक़ी । रईस पढ़ने में इतना मगन हो जाते थे कि एक मर्तबा जौन को गोद में लेके ईदगाह गए और साथ अपनी किताब भी ले गए । किताब तो वापस ले आए मगर जौन को वहीं भूल आए । दूसरे भाई के बारे में जौन ने ख़ुद लिखा है कि "मैंने इन जैसा मुतालेआ करने वाला इंसान नहीं देखा"। जौन ने पढ़ा और ख़ूब पढ़ा । मज़हब और फलसफ़ा पसंदीदा मौज़ू थे । अपने दौर में नौजवानों के पसंदीदा तरीन कम्यूनिज़्म से भी मुतास्सिर हुए । कामरेड नाज़िश अमरोहवी को कम्यूनिज़्म और सियासियात में अपना उस्ताद मानते थे ।

ये वो दौर था जब सियासत के अलावा, कम्यूनिज़्म, फलसफ़ा और अदब नौजवानों के पसंदीदा सब्जेक्ट हुआ करते थे । अमरोहा एक छोटा सा क़स्बा था । और मज़हब (इस्लाम ) समाज पर पूरी तरह से हावी था । ऐसे माहौल में भी लड़कों को इतनी आज़ादी थी कि वो ख़ुदा के होने और न होने पर बात करते थे । उलेमा भी बड़ी शाइस्तगी से उनकी बातों का जवाब देते थे या नज़र अंदाज़ कर देते थे । बड़ी बात ये है कि इतने सेनसिटिव मुद्दे पर खुल कर बात की जा सकती थी । मगर आज हालत इसके बिलकुल उल्टे हैं । आज का अमरोहा वो है जहां एक एस एम एस बलवे जैसे हालात पैदा कर सकता है । सुनने और समझने की ताक़त लोगों शायद बिलकुल भी नहीं रही । मज़हबी कट्टरपन धीरे धीरे अपने पैर जमा रहा हा । जिसकी असर यहाँ रहते हुए महसूस किए जा सकते हैं ।

यही अमरोहा है जहां जौन के ख़ुदा के उनवान से कहे गए शेर सुन कर लोगों की त्योरी पर बल आ जाते हैं । और ये बर्ताव नामनिहाद अनपढ़ लोगों की तरफ़ से नहीं बल्कि समाज के पढे लिखे और प्रोग्रेसिव कहे जाने वाले लोगों की तरफ़ से आता है । सोच बिचार की ज़रूरत है । जहां एक तरफ़ असहिष्णुता जैसे मुद्दे बहस का उनवान हैं वहीं यहाँ धीरे धीरे हालात बदल रहे हैं । समाज के सुलझे हुए, खुले दिमाग़ वाले लोगों को ग़ौर करने की ज़रूरत है ।

(अबू तुराब नक़वी)

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