अमोढ़ा और अमरोहा का अंतर


बचपन में भी और बड़े होने के बाद भी अक्सर ये बात कानों में पढ़ती थी कि अमिताभ बच्चन के पूर्वजों का संबंध अमरोहा से था । ये बात थोड़ी अटपटी तो लगती थी । मगर बाद में थोड़ा इतिहास जाना तो यह पता चला कि यह सत्य भी हो सकता है । इसके पीछे कारण ये है कि अमरोहा जिसका इतिहास लगभग 2500 ई0पू0 बताया जाता है में विभिन्न जातियों तथा धर्मों के लोग रहते आए हैं । इन्हीं में कायस्थों का इतिहास भी पुराना है । अब चूंकि बाबू हरिवंश राय बच्चन, ( अमिताभ बच्चन के पिता ) कायस्थ थे इसी कारण शायद किसी महानुभाव ने ये पढ़ लिया हो या कोई ग़लती हो गयी हो कि इनके पूर्वज अमरोहा के थे । वैसे यह बात अमरोहा में आम तौर से नहीं कही जाती मगर कुछ लोगों यह भ्रम अवश्य है ।

जब मैंने हरिवंश राय बच्चन को पढ़ना प्रारम्भ किया तो उनकी विश्व विख्यात "मधुशाला'' को पढ़ने के बाद उनकी आत्मकथा पढ़ने की चेष्ठा हुई । मन में उपरोक्त लिखी बात के लिए भी उत्सुकता कौंद रही थी । उनकी आत्मकथा जो कि चार भागों में है का पहला भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ'' मैंने पढ़ना शुरू किया। इस भाग में उन्होने अपने पूर्वजों के बारे में विस्तृत रूप से लिखा है । किताब पढ़ने के बाद एक भ्रम तो दूर हो गया कि उनके पूर्वज अमरोहा से नहीं बल्कि अमोढ़े से थे जो कि उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले का एक गाँव है । और यहीं से उनके पुरखे इलाहाबाद जाकर बसे और वहीं के होकर रह गए ।

अभी हाल ही में यही बात भारत के सर्वप्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद के बारे में भी सुनने को मिली । उत्सुकता हुई तो उनके विषय में भी खोजबीन की । उनकी आत्म कथा के अंश पढ़ने पर उनके विषय में उभरे भ्रम भी दूर हो गए ।

तो निष्कर्ष यह निकला कि बहुत सी बातें आम लोगों में, कभी कभी ख़ास लोगों में भी, यूंही आम हो जाती है । और यह आम तौर से लोगों को भ्रम तथा संशय की स्तिथी में ही रखती हैं । किन्तु थोड़ी से खोजबीन करने पर भ्रम को दूर किया जा सकता है ।

No comments:

Post a Comment