Ghazal on Holi

 
दिल से भाते हैं मुझे सब इस्तेआरे रंग के
ज़िंदगी भी कटती जाती है सहारे रंग के

دل سے بھاتے ہیں مجھے سب استعارے رنگ کے
زندگی بھی کٹتی جاتی ہے سہارے رنگ کے

रोशनी बनकर तेरी जानिब खिंचा जाता हूँ मैं
सादा लौ हूँ पर समझता हूँ इशारे रंग के

روشنی بنکر تری جانیب کھنچا جاتا ہوں میں
سادہ لو ہوں پر سمجھتا ہوں اشارے رنگ کے


राह में होली पे निकेलगा वो रंगोली बदन
और मैं भर भर के मारूँगा ग़ुबारे रंग के

راہ میں ہولی پہ نکلے گا وہ رنگولی بدن
اور میں بھر بھر کے مارونگا غبارے رنگ کے


ख़ूब खनकेंगी कलाईयों में धानी चूड़ियाँ
ओर रगड़ खा खा के फूटेंगे शरारे रंग के

خوب کھنکینگی کلائیوں میں دھانی چوڑیان
اور رگڑ کھا کھا کے پھوتٹینگے شرارے رنگ کے


मैंने भी देखा तो आँखों में जलन होने लगी
शहर भर में आम  थे चर्चे तुम्हारे रंग के

میں نے بھی دیکھا تو آنکھوں میں جلن ہونے لگی
شہر بھر میں عام تھے چرچے  تمہرارے رنگ کے


रक़्स होगा, मैकशी होगी, ख़ुशी होगी तुराब
हर तरफ़ हर गाम पे होंगे नज़ारे रंग के

رقص ہوگا، مے کشی ہوگی،خوشی ہوگی تراب
ہر طرف ہر گام پہ ہونگے نظارے رنگ کے


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