Nazm - Lamhon mein bat raha hun

لمحوں میں بٹ رہا ہوں
 کیا میں سمٹ رہا ہوں

 लम्हों मे बट रहा हूँ मैं
क्या  मैं  सिमट रहा हूँ 

سب آگے جا رہے ہیں
 میں پیچھے ہٹ رہا ہوں

सब आगे जा रहे हैं
मैं पीछे हट रहा हूँ

ہاں عمر بڑھ رہی ہے
 پر میں تو گھٹ رہا ہوں

हाँ उम्र बढ़ रही है
पर मैं तो घट रहा हूँ

باہر سے بن رہا ہوں
 اندر سے کٹ رہا ہوں

बाहर से बन रहा हूँ
अंदर से कट रहा हूँ

منزل تو سامنے ہے
 پر میں پلٹ رہا ہوں

मंज़िल तो सामने है
पर मैं पलट रहा हूँ

تمکو خبر نہیں کیا
 میں تمسے سٹ رہا ہوں

तुमको खबर नहीं क्या
मैं तुमसे सट रहा हूँ

میں خود کا بھوت بنکر
 خود کو چمٹ رہا ہوں

मैं ख़ुद का भूत बनकर
ख़ुद को चिमट रहा हूँ

خود اپنی قبر بنکر
 میں خود میں پٹ رہا ہوں

ख़ुद अपनी क़ब्र बनकर
मैं ख़ुद में पट रहा हूँ

میں خود ہی خاک اڑاکر
 مٹی میں اٹ رہا ہوں

मैं ख़ुद ख़ाक उड़ाकर
मिट्टी में अट रहा हूँ


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