Nazm - Main kaun hun main kya hun


- Abu Turab Naqvi

 अक्सर ये सोचता हूँ
मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ

ऊपर से बन के आया
या मैं यहीं बना हूँ

कोई ख़ुदा है मेरा
या ख़ुद ही मैं ख़ुदा हूँ

जाऊंगा किस जगह मैं
किस जा1 से आ रहा हूँ

मैं जिस्म हूँ किसी का
या कोई आत्मा हूँ

है कौन मेरा चेहरा
मैं किस का आईना हूँ

मैं गहरी ख़ामोशी हूँ
या मैं कोई सदा हूँ

मैं वक़्त के बदन पर
इबहाम2 की रिदा हूँ

मैं इख्तेतामे3 शब हूँ
मैं सुबहे इब्तेदा4 हूँ

लेकिन सवाल ये है
मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ

1: स्थान, जगह 2: अज्ञात 3: अंत 4: शुरुआत

اکثر یہ سوچتا ہوں
میں کون ہوں میں کیا ہوں

اوپر سے بن کے آیا
یا میں یہیں بنا ہوں

 کوئی خدا ہے میرا
 یا خودہی میں خدا ہوں

جاؤنگا کس جگہ میں
کس جا سے آ رہا ہوں

میں جسم ہوں کسی کا
یا کوئ آتما ہوں

ہے کون میرا چہرہ
میں کس کا آئینہ ہوں

میں گہری خامشی ہوں
یا میں کوئی صدا ہوں

میں وقت کے بدن پر
ابہام کی ردا ہوں

میں اختتام شب ہوں
میں صبحِ ابتدا ہوں

لیکن سوال یہ ہے
میں کون ہوں میں کیا ہوں

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