Ghazal: Chaand raaton ke ratjagey or main


chaand raaton ke ratjagey or main
uski yadon ke silsiley or main

चाँद रातों के रतजगे और मैं
उसकी यादों के सिलसिले और मैं

dheemi dheemi si uskey qurb ki lau
paas jaltey hue diye or main

धीमी धीमी सी उसके कुर्ब* की लौ
पास जलते हुए दिये और मैं

*(पास होना, क़रीब होना)

baat karti hui si khamoshi
gung lafzon ke qafle or main


बात करती हुई सी ख़ामोशी
गुंग लफ़्ज़ों के क़ाफले  और मैं

bheeni bheeni si uski yaad ki boo
 bekhudi, dil ke walwaley or main

भीनी भीनी सी उसकी याद की बू
बेखुदी, दिल के वलवले और मैं

mez par raushnai bikhri hui
chand auraaq adhlikhey or main

मेज़ पर रौशनाई बिखरी हुई
चंद औराक़* अधलिखे और मैं

*(पन्ने, पेज )

dono ik doosre ke chehragar
aaina mere saamne or main

दोनों इक दूसरे के चेहरागर*
आईना मेरे सामने मेरे सामने और मैं

*(चेहरा बनाने वाला, चित्रकार)

apne maa'ni talash karte hue
ye mere lafz ankahe or main

अपने मानी तलाश करते हुए
ये मेरे लफ़्ज़ अनकहे और मैं

koi matlab nahin hai dono ka
mere ash'aar betuke or main

कोई मतलब नहीं है दोनों का
मेरे अशआर* बेतुके और मैं

*(शेर)

- Abu Turab Naqvi

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