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Showing posts from November, 2015

दिलासा

"मैं तुम्हें नानी के घर पे छोड़ दूंगा । वहाँ अच्छे से रहना । ठीक है ? ", बाप बच्चे को समझा रहा था । "मगर मुझे तो आपके साथ रहना है । मुझे नहीं रहना वहाँ ।" बच्चा शिकायत भरे लहजे में कह रहा था । "बेटा वहाँ नानी तुम्हें नहला दिया करेंगी ,कपड़े बदला देंगी । और वहाँ तुम्हारी मौसी भी तो हैं । तुम अच्छे से रहोगे वहाँ । मैं कैसे तुम्हें देख पाऊँगा यहाँ । और फिर मैं आया करूंगा न मिलने हफ़्ता दस दिन में । तुम बिलकुल परेशान मत होना । मुझे याद करके रोना मत । नहीं तो नानी भी परेशान हो जाएंगी । " ये समझाते हुये बाप की आँखों में करुणा और प्रेम के मिले जुले भाव थे । वो कभी अपने बच्चे के सर पर हाथ फेरता, कभी उसके माथे को चूमता । बस जाम की वजह से धीरे धीरे बढ़ रही थी । गाड़ियों के शोर में बच्चे की सुगबुगाहट खो गयी थी । क्या कारण हो सकता है इस सब का ? कहीं बच्चे की माँ को तो कुछ नहीं हो गया ? नहीं नहीं भगवान न करे ऐसा हो । मैं विचारों की ऊहा पोह में उलझा उन दोनों की ओर देखे जा रहा था । बस कभी रुक जाती थी कभी तेज़ चलने लगती थी । विचार कठोर होते जा रहा था । मन रूआँसा सा हो गया

Reflection

I may look dull I may look dumb I may appear stupid When I talk When I come out with my ideas I may sound profane Cursed, antisocial uncultured or whatever But, In my mind, there is something something that is devastating the whirlpool of uncontrolled thoughts shattering the tiny boat of my conscience  I may appear dull outside, but inside In my mind I am hyper active Possessing profound thoughts Abstract philosophies Subtle ideas about life, about everything that exists or doesn't exist I may appear thoughtless Always talking like a parrot repeating words that have meanings or have no meanings at all But, inside in my mind, I am beleaguered by the thoughts wanted, unwanted shallow, deep noble or evil thoughts I may appear anything You reflect

میں اور جون ایلیا

1931- 2002 مجھے اچھی طرح یاد ہے کی بچپن میں میرے گھر میں ایک قطعہ  اور دو لوگوں کا ذکر وقتًا فوقتًا   ہوتا تھا۔ قطعہ تھا جون ایلیا کی مشہور نظم رمز کا۔ اور وہ دو لوگ تھے خود جون ایلیا اور انکی اہلیہ زاہدہ حنا۔  یہی وہ دن تھے جب میرا بھائ جون سے تعرف ہوا تھا۔ بھائ جون، محلہ کے تمام لوگ جون ایلیا کو بھائ جون ہی کہکر یاد کیا کرتے تھے۔ جون  کی فلسفیانہ شاعری تو خیر الگ ہے مگر جون کے کچھ اشعار محلہ کے تقریبًا ہر فر د کو یاد ہوا کرتے تھے۔انمیں شرم، دہشت، جھجھک۔۔۔۔۔۔۔،اور تم جب اوگی تو کھیا ہوا پاوگی مجھے۔۔۔۔۔اکژر سنے اور سنائے جاتے تھے۔ جون سے میرا باقاعدہ تعرف ۲۰۱۰ کے اواخر میں ہوا۔ محلہ کے کچھ لڑکے جون کے بڑے شیدائ تھے۔جن میں اسلم بھائ اور اشرف بھائ کے نام اہم ہیں۔ انہی کی معرفت سے میری جون ایلیا کی شاید تک رسائ ہوئ۔اور پھر اسکے بعد فیسبک پر جون ایلیا کا پیج جوائن کیا جسے خالد احمد انصاری چلاتے ہیں۔ یہیں سے جون اور میرا باقاعدہ رشتہ قائم ہوا تھا۔ امروہہ کے ایک شاعر جو کہ پاکستان ہجرت کر گئے تھے کی حیثیت سے تو جون کو پہلے سے جانتا تھا مگر جون کو جون ایلیا کی طرح جاننے اور سمجھنے

आख़िरी मुलाक़ात

- तुम लव स्टोरीज़ क्यूँ पढ़ते हो इतना ? और शाएरी में भी तुम्हें रोमांटिक्स ज़्यादा पसंद हैं ? अपने मासूम अंदाज़ में उसने पूछा था और सवाल सुनकर मेरी आँखों में चमक आ गयी थी और होंटों पर हल्की सी मुस्कान। - हम्म.... हम उन्हीं चीजों के बारें में ज़्यादा बात करना पसंद करते हैं जो हुमें मिल न पायी हों या मिलती न हों। मैंने थोड़ा सीरियस होते हुये जवाब दिया था । जिसे सुनकर वो थोड़ी उदास सी हो गयी थी । वो शायद मेरी अतीत के बारे में सोचने लगी थी या अपनी वर्तमान के बारें में जिसमें वो मेरे साथ थी, मुझसे मोहब्बत करती थी । उसे शायद लगा हो की मैं उसकी मोहब्बत पे शक कर रहा हूँ। फिर मैंने बात बदलते हुए उसे अपनी पसंद का शेर सुनाने के लिए कहा था । - शेर? मुझे तो तुम्हारे ही शेर पसंद हैं । उसने फ्लर्ट करने के अंदाज़ में कहा था । - सुनाओं न प्लीज़! मैं झुँझलाते हुए कहा था - अच्छा! रुको  एक मिनट याद कर लेने दो और वो कुछ देर के लिए सोच में गुम हो गयी थी । इस समय उसका मासूम चेहरा मेरी निगाहों में था । - अरे यार ! नहीं याद आ रहा कोई फिर कुछ देर बाद उसने परेशान होते हुए कहा था । -तुम्ही कोई शेर सुना दो

कॉफ़ी, किताब और कशमकश

- ये लो ठंडी हो जाएगी वरना ये कहते हुये कॉफ़ी का कप उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। उसका ध्यान पास में मुंडेर पर रखे  पानी के बर्तन की तरफ़ था जिससे एक कौवा पानी पीने की कोशिश कर रहा था । उस दिन इंडियन कॉफ़ी हाउस में ज़्यादा भीड़ नहीं थी । बराबर वाली मेज़ पर एक अंकल अखबार पढ़ रहे थे । वो अखबार और उसकी सुर्खियों के साथ खोये हुए थे  । उनकी कॉफ़ी में से धुआँ धीरे धीरे हल्का हो रहा था। मेरे कहने पर उसका ध्यान टूटा। - हम्म् तुम पियो मैं लेती हूँ अभी उसने रूखे से लहजे में कहते हुये अपने बैग से किताब निकली और उसके पन्ने पलटने लगी। एक पन्ना जो उसने मोड़ रखा था उसे पढ्न शुरू कर दिया - मैं तुमसे बात करने के लिए आया हूँ और तुम किताब में बिज़ि (busy ) हो  मैंने भी झुँझलाते हुए कहा - हम्म बोलो! उसने बेदिली से किताब बंद करते हुए मुझसे कहा। उसकी कॉफ़ी का धुआँ भी धीरे धीरे कम हो रहा था । - मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की आखिर तुम्हारे बर्ताव में एकदम से इतना चेंज (change)  क्यूँ आ गया मैंने हैरानी से उसकी तरफ़ देखते हुए पूछा - नहीं तो ! कहाँ चेंज (change)  आया है ? उसने ऐसे जवाब दिया की जैसे कुछ हुआ ही न हो और सबकुछ

नेहरू प्लेस

हार्न की तेज़ आवाज़ रुकी तो किसी की  मीठी सी  बोहोत धीमी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी । "एक्स्क्युज़ मीं! आप बता सकते हैं यहाँ से नेहरु प्लेस कैसे जाना है?" सवाल आसान था मगर सवाल पूछने वाला इतना मुश्किल कि एकदम से जवाब नहीं दे पाया और कुछ लम्हों तक उसके मासूम चेहरे को देखता रह गया। वो भी हैरान थी । थोड़ा uncomfortable लगी तो मेरी नज़रे सकपकाईं और मैंने तुरंत हकलाने के क़रीब लहजे में जवाब दिया, "अ....आप यहाँ से ग्रामीण सेवा या कोई भी बस लेकर जुलैन रेड लाइट उतर जाइए और वहाँ से 534 पकड़ लीजे जो आपको सीधे नहरु प्लेस पहुंचादेगी" "ओके थैंक यू " कहकर उसने नज़र बचा ली । उसका सवाला तो पूरा हो चुका था । मगर मेरी नज़रें तो अब भी सावली थीं। वो उलझन में थी । उसकी नज़रें बस आने के रास्ते की तरफ़ टिकी थीं । कोई भी गाड़ी नहीं आ रही थी । कभी वो अपनी चेन वाली हाथ घड़ी की तरफ़ देखती और कभी सड़क के इधर उधर नज़र दौड़ाती । वो इस उलझन में थी कि कोई गाड़ी जल्दी से आ जाए । और इधर मेरा हाल ये थे कि  जैसे कोई बच्चा मासूमियत भरे लहजे में दुआएं कर रहा हो कि काश कुछ देर लिए कोई भी गाड़ी नहीं ना आए । सवाल पू

میں اور بھگت سنگھ

  بھگت سنگھ اور میرا رشتہ اسی طرح   قائم ہوا جس طرح میرے ہم عمر بچوں کا ہوا تھا۔ درسی کتابوں اور بھگت سنگھ کی زندگی پر بننے والی فلموں نے ایک نقش دماغ پر بٹھا دیا تھا جوایک مدت تک قائم رہا۔ مجھے درسی کتب پڑھنے کا شوق کبھی نہیں رہا۔ شاید یہی وجہ ہے کی میں تعلیمی ریس میں اوروں سے تھوڑا پیچھے ہوں۔مگر درسی کتا بوں کے علاوہ چمپک اور کامکس پڑھنے کا ہمیشہ سے شوق رہا ہے۔ شروع میں اردو اور انگریزی باآسانی نہیں پڑھ پاتا تھا۔ تعلیم کا میڈیم ہندی تھا اس لیے ہندی با آسانی پڑھ لیتا تھا۔ مگر دل میں خواہش تھی کہ اردو اور انگریزی میں بھی کتابیں پڑھنی ہیں۔ کوشش کرتا رہا اور دھیرے دھیرے ان دونوں زبانوں میں بھی کتب پڑھنے لگا۔  یہ بات قابل فہم ہے کی جتنی زیادہ زبانیں ہم جانتے ہونگے ہمارا مطالعہ کا داعرہ بھی اتنا ہی وسیع تر پوگا۔چونکی میرا تعلق امروہہ سے ہے اور امروہہ ہندوستان اور بیرون ہندوستان اردو شعر و ادب میں اپنی خدمات کے لئے جانا جاتا ہے۔ مگر قابل حیرت ہو سکتا ہے کی امروہہ میں کوئ بھی اچھی کتابوں کی دکان نہیں جہاں آپکو معیاری کتب مل جائیں۔ حال ہی میں محلہ گزری میں ایک دکان قائم تو ہوئ ہے مگر وہ

Unfinished Assignments: Confession of a Dead Jamia Student

Almost all the examinations at Jamia were over. Most of the students had gone back to their hometowns for the summer holidays. Only a few students were left at the university who used to come to the library to study. I too had gone home for a few days but returned early because I had to prepare for a competitive entrance exam. It was a usual evening for me at the Old Dr. Zakir Husain Library. The library closing time of 12 midnight was coming closer and the students were gradually leaving the library reading room. I, however, decided to stay till closing time because I wanted to finish the unit I was reading before I left for the night. It was 11:20 p.m. according to my watch, and almost all the students had left by that time. Only two or three students were still left in the room and it looked like they were getting ready to leave too. I thought of going to the washroom, so I stepped out. I usually sit in the library reading hall on the first floor, while the washrooms

15 Wonderful Quotes about Writing and Writers

Writing is an art that needs inspiration be it in the form of words or phrases. Here are some wonderful quotes from famous writers, poets, and critics that will give you the spark of inspiration to lighten up the writer's flame in you. Quote 1 - Beware of bad writing!   Quote 2 - Bleed the stories out! Quote 3 - Tell you stories before you die!    Quote 4 - Writing is not that important!   Quote 5 - Start now! Quote 6 - Write whenever you feel like! Quote 7 - It is as easy as dancing!    Quote 8 - It's tongue twister!    Quote 9 - Women! have your room first!    Quote 10 - Let the rhythm flow in your prose!    Quote 11- Read before you write!    Quote 12 - Childhood fairy tales!    Quote 13 - Simply writing!    Quote 14 - Begin from the beginning!    Quote 15 - Convey the feeling!