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Showing posts from February, 2017

गुप्त रोगी मिलें

मीर साब ये गुप्त रोगी कौन से होते हैं ? भय्या आई बी, रॉ और दूसरी खूफिया एजेंसियों के रोगी गुप्त रोगी कहलाते हैं । ख़ैर ये तो थी मज़ाक की बात । मगर मुद्दा ये है कि दुनिया भर में अमरोहा कि शोहरत का दावा करने वाले बड़ी बड़ी हाँकते हैं । जौन, रईस, कमाल, ढोलक, क़ालीन, बिच्छू और न जाने क्या क्या के नाम गिनाकर फ़ख्र करने वाले दिल्ली में अपना होमटाऊन मुरादाबाद ही बताते हैं । मगर सच तो ये है कि कश्मीर से कन्याकुमारी और इधर से उधर अमरोहा अपने गुप्त रोगी मिलें वाले हकीमों की वजह से ही फ़ेमस है । और ताज़ा सूचना की माने तो जापानी भी इलाज करने गुप्त में अमरोहा आ रहे हैं । अमरोहा के एक कोने से दूसरे सिरे तक निकल जाइए । न पूरा अमरोहा आपको गुप्त रोगी लगने लगे तो कहना । दुनियाँ कैंसर, एड्स के साथ ही सर खपा रही है और हमारे यहाँ सारे रोगों का शर्तिया, जी हाँ शर्तिया इलाज किया जा रहा है । मगर भय्या ये गुप्त रोगी कौन से होते हैं । अरे अभी बताया तो। आपने कभी गुप्त रोगी देखा है ? अमां यार जब देख लिया तो गुप्त काहेका ! हम्म... सही है ।

आप मेरी क़मीज़ सीजिएगा? (अति लघु कथा)

अभी पिछले दिनों यहाँ वहाँ चारों तरफ़ वेलेंटाइन डे की धूम थी। फ़ेसबुक से लेकर ट्वीटर तक इसी की चर्चा थी । मैं उन दिनों अमरोहा में था । जब वातावरण में प्रेम ही प्रेम फैला हो तो किसी पर भी उसका असर होना स्वाभिक है । मुझपर भी प्रेम का जादू चढ़ चुका था । एक तो प्रेम का भूत और उसपर पहले से जॉन एलिया का भूत। हालत गंभीर थी । एक दिन एक रेस्टोरेन्ट में बैठा चाय पी रहा था तो सामने की टेबल पर एक सुंदर सी लड़की को बैठा देखा। उसे देखकर दिल में लव एट फ़र्स्ट साइट वाली भावना कुलबुलाने लगी । आओ देखा न ताओ सीधे जाके उस लड़की को जॉन एलिया स्टाइल में कुछ यूं प्रपोज कर डाला... आप मुझको बोहोत पसंद आयीं आप मेरी क़मीज़ सीजिएगा? मेरी इतनी बेबाकी देखकर वो लड़की और उसके साथ बैठी मंद मंद मुसकुराती उसकी सहेली सन्न रह गयी। उसने मेरे सवाली चेहरे को देखा । अपने मासूम से होंट को हिलाया और बोली ,"अंधे! मैं तुझे दर्ज़न दिख रही हूँ । बड़ा आया आशिक़ कहीं का!"

डिप टी (अति लघु कथा)

आदत के अनुसार सारे ज़रूरी काम छोड़ कर राहुल के स्टाल पर डिप टी पीने को गया तो वहाँ काउंटर पर एक बहुत ही मासूम सी साँवली लड़की को खड़ा पाया। साँवला रंग मुझे हमेशा अपनी ओर खींचता है । ख़ुद को तो क़ाबू में कर लिया । मगर नज़र पर क़ाबू नहीं कर पा रहा था। जब ज़ब्त हद से गुज़र गया तो आखिर उससे पूछ बैठा । एक्सक्यूज़ मी! आप मेरे साथ चाय पीना पसंद करेंगी । उस अपना मासूम चेहरा मेरी तरफ़ घुमाया। नज़रे ऊंची की और बड़े बेबाक लहजे में कहा , "गेट लॉस्ट!"

और नीलकंठ बनूँ मैं

तू इक विष का प्याला हो और नीलकंठ बनूँ मैं फिर तांडव हो नृत्य हो जल थल भूतल हो तेरी गुथी हुई जटाओं से लिपटूँ मैं सर्प बनूँ और तांडव हो नृत्य हो जल थल भूतल हो तीन लोक में हलचल हो तांडव हो नृत्य हो जल थल भूतल हो !   (अबू तुराब नक़वी )

Nazm - Lamhon mein bat raha hun

لمحوں میں بٹ رہا ہوں  کیا میں سمٹ رہا ہوں  लम्हों मे बट रहा हूँ मैं क्या  मैं  सिमट रहा हूँ  سب آگے جا رہے ہیں  میں پیچھے ہٹ رہا ہوں सब आगे जा रहे हैं मैं पीछे हट रहा हूँ ہاں عمر بڑھ رہی ہے  پر میں تو گھٹ رہا ہوں हाँ उम्र बढ़ रही है पर मैं तो घट रहा हूँ باہر سے بن رہا ہوں  اندر سے کٹ رہا ہوں बाहर से बन रहा हूँ अंदर से कट रहा हूँ منزل تو سامنے ہے  پر میں پلٹ رہا ہوں मंज़िल तो सामने है पर मैं पलट रहा हूँ تمکو خبر نہیں کیا  میں تمسے سٹ رہا ہوں तुमको खबर नहीं क्या मैं तुमसे सट रहा हूँ میں خود کا بھوت بنکر  خود کو چمٹ رہا ہوں मैं ख़ुद का भूत बनकर ख़ुद को चिमट रहा हूँ خود اپنی قبر بنکر  میں خود میں پٹ رہا ہوں ख़ुद अपनी क़ब्र बनकर मैं ख़ुद में पट रहा हूँ میں خود ہی خاک اڑاکر  مٹی میں اٹ رہا ہوں मैं ख़ुद ख़ाक उड़ाकर मिट्टी में अट रहा हूँ

Nazm - Main kaun hun main kya hun

- Abu Turab Naqvi  अक्सर ये सोचता हूँ मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ ऊपर से बन के आया या मैं यहीं बना हूँ कोई ख़ुदा है मेरा या ख़ुद ही मैं ख़ुदा हूँ जाऊंगा किस जगह मैं किस जा 1 से आ रहा हूँ मैं जिस्म हूँ किसी का या कोई आत्मा हूँ है कौन मेरा चेहरा मैं किस का आईना हूँ मैं गहरी ख़ामोशी हूँ या मैं कोई सदा हूँ मैं वक़्त के बदन पर इबहाम 2 की रिदा हूँ मैं इख्तेतामे 3 शब हूँ मैं सुबहे इब्तेदा 4 हूँ लेकिन सवाल ये है मैं कौन हूँ मैं क्या हूँ 1: स्थान, जगह 2: अज्ञात 3: अंत 4: शुरुआत اکثر یہ سوچتا ہوں میں کون ہوں میں کیا ہوں اوپر سے بن کے آیا یا میں یہیں بنا ہوں  کوئی خدا ہے میرا  یا خودہی میں خدا ہوں جاؤنگا کس جگہ میں کس جا سے آ رہا ہوں میں جسم ہوں کسی کا یا کوئ آتما ہوں ہے کون میرا چہرہ میں کس کا آئینہ ہوں میں گہری خامشی ہوں یا میں کوئی صدا ہوں میں وقت کے بدن پر ابہام کی ردا ہوں میں اختتام شب ہوں میں صبحِ ابتدا ہوں لیکن سوال یہ ہے میں کون ہوں میں کیا ہوں