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Showing posts from July, 2017

कामरेड मुसव्विर हुसैन 'नज्म' की तलाश में

Source: QM Financial "आपने कामरेड मुसव्विर हुसैन नज्म का नाम सुना है?" "नहीं मियां! मैंने तो नहीं सुना।" "अरे आप ही के मोहल्ले के थे । शायर भी थे ।" "नहीं यार पता नहीं मुझे। किसी बड़े से पता करो!" अमरोहा के मोहल्ला गुज़री में जब कुछ लोगों से मुसव्विर हुसैन नज्म के बारे में पूछताछ की तो मायूसी ही हाथ लगी । सिर्फ़ एक बुजुर्ग से उनके बारे में जो पता लगा वो एक आर्टिक्ल लिखने के लिए नाकाफ़ी था । मगर फिर भी मैं इस कश्मकश में रहा कि कहीं से कुछ मालूम हो जाए । आप सो च रहे होंगे कि मुझे उनके बारे में कहाँ से पता चला । इसका जवाब ये है कि उनसे मेरी मुलाक़ात जॉन एलिया ने कराई । जब पहली मर्तबा जॉन की "शायद" का मुक़दमा पढ़ा तो वहाँ जॉन ने कामरेड मुसव्विर हुसैन का ज़िक्र कुछ इस तरह से किया है ....  "अमरोहा के इल्मी माहौल में दो मसले सबसे ज़्यादा अहमियत रखते थे । पहला मसला ये था कि ख़ुदा मौजूद है या नहीं? और दूसरा मसला सियासत (राजनीति) से ताल्लुक़ रखता था। यहाँ दो सवाल पैदा होते थे । एक ये कि आया मग़रिबी जम्हूरियत (पश्चिम का लोकतन्त्र)